आवाज़ ए दिल
देवियों का चरित्र लगती है,
मंदिरों सी पवित्र लगती है,,
रूह महकी है हर्फ महके हैं,
वह ग़ज़ल प्रेम इत्र लगती है,,
कल्पना से भी है अनूठा सच,
बात कितनी विचित्र लगती है,,
जिन्दगी केनवाश के जैसी,
भावनाओ का चित्र लगती है,,
मुझ को रहने नहीं दे-ती तन्हा,
सब से अच्छी वो मित्र लगती है,,
Gopal Gupta "Gopal"
Varsha_Upadhyay
03-May-2024 01:54 PM
Nice
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sachin goel
02-May-2024 10:56 AM
ठीक है
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Babita patel
02-May-2024 10:52 AM
V nice
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